CLASS 6 : हिंदी : मातृभूमि

 CLASS 6 : हिंदी  

मातृभूमि

 ऊँचा खड़ा हिमालय

आकाश चूमता है,

नीचे चरण तले झुक,

नित सिंधु झूमता है।

 

गंगा यमुन त्रिवेणी

नदियाँ लहर रही हैं,

जगमग छटा निराली,

पग-पग छहर रही हैं।

 

वह पुण्य-भूमि मेरी,

वह स्वर्ण-भूमि मेरी।

वह जन्मभूमि मेरी

वह मातृभूमि मेरी।

 

झरने अनेक झरते

जिसकी पहाड़ियों में,

चिड़ियाँ चहक रही हैं,

हो मस्त झाड़ियों में।

 

अमराइयाँ घनी हैं

कोयल पुकारती है,

बहती मलय पवन है,

तन-मन सँवारती है।

 

वह धर्मभूमि मेरी,

वह कर्मभूमि मेरी।

वह जन्मभूमि मेरी

वह मातृभूमि मेरी।

 

जन्मे जहाँ थे रघुपति,

जन्मी जहाँ थी सीता,

श्रीकृष्ण ने सुनाई,

वंशी पुनीत गीता।

 

गौतम ने जन्म लेकर,

जिसका सुयश बढ़ाया,

जग को दया सिखाई,

जग को दिया दिखाया।

 

वह युद्ध-भूमि मेरी,

वह बुद्ध-भूमि मेरी।

वह मातृभूमि मेरी,

वह जन्मभूमि मेरी।

 

पुस्तक : मल्हार (पृष्ठ 1) रचनाकार : सोहनलाल द्विवेदी प्रकाशन : एनसीईआरटी


SUMMARY :

मातृभूमि कविता में कवि सोहनलाल द्विवेदी जी ने भारत के प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्धि का वर्णन किया है । कवि का कहना है कि भारत की उत्तर दिशा में स्थित हिमालय पर्वत की ऊँची चोटियाँ आकाश को स्पर्श करती हुई प्रतीत होती है। विश्व का सबसे ऊँचा हिमालय पर्वत भारत के गौरव का प्रतीक है। दक्षिण में स्थित हिंद महासागर भारत माँ के चरणों को स्पर्श करता है और अपने भाग्य पर इतराता है।

यह ऐसा पवित्र देश है जिसमें गंगा, यमुना एवं सरस्वती जैसी पवित्र नदियों का संगम स्वतः होता है। जिसका अद्भुत सौंदर्य चारों ओर बिखरा प्रतीत होता है। कवि को भारत की भूमि पवित्र एवं स्वर्णिम प्रतीत होती है। उसे अपनी मातृभूमि, अपनी जन्मभूमि भारत पर अत्यधिक गर्व है। भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में कल-कल बहते हुए झरने यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं । हरे-भरे वनों में चिड़ियों की चहचहाहट से वातावरण मदमस्त हो जाता है। आम के घने बगीचे में वसंत ऋतु के आगमन पर कोयल की मीठी कूक सुनाई देती है। भारत धरती पर बहती शीतल व शुद्ध हवा हर प्राणियों के तन-मन में स्फूर्ति व ताज़गी भर देती है।

यहाँ अनेक धर्मों की स्थापना हुई जिससे जीवन के संदेश लोगों को मिले। इस देश की पावन धरती पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने जन्म लिया जो लोगों के लिए जीवन जीने का आदर्श बने। नारी धर्म का आदर्श प्रस्तुत करने वाली सीता माता की यह पुण्य भूमि है। कर्म का संदेश देने वाले श्रीकृष्ण भी इसी धरती पर जन्मे । प्रेम और अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध भी भारत भूमि के ही रत्न थे। कवि का मानना है कि यह युद्ध भूमि, यह बुद्ध भूमि मेरी मातृभूमि है, मेरी जन्मभूमि है। इस पर मुझे गर्व है।


QUES & ANSWERS:

1.  1. मातृ भूमि कविता के कवि कौन है ?

उत्तर : सोहनलाल द्विवेदी जी |


2. मातृभूमि कविता में किसकी प्रशंसा की गयी है ?

उत्तर :  भारत की प्रसंशा की गई है।


3. हिंद महासागर के लिए कविता में कौन सा शब्द आया है ?

उत्तर: {A} चरण


4. कोयल कहाँ रहती है ?

उत्तर: कोयल आम के पेड़ पर रहती है।


5.तन-मन कौन संवारती है ?

उत्तर : तन मन को मलय पर्वत से बहने वाली पवन संवारती है |

 

6. झरने कहाँ से झरते हैं ?

उत्तर : झरने पहाडियों से झरते है |

 

7. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था ?

 

उत्तर: श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश सुनाया था।

 

9.गौतम ने किसका यश बढाया ?

उत्तर: गौतम ने भारत देश का यश बढाया |

 

10. किसका पानी लहर रहा है ?

उत्तर : गंगा-यमुना , सरस्वती का पानी हिलोरे लेकर मस्ती से आगे बढ़ रहा है |

 

11. कविता में माता पिता की भूमिका को कैसे देखा गया है?

उत्तर: कविता में माता पिता को प्रेम, देखभाल और सुरक्षा देने वाले के रूप में देखा गया है। जो बच्चों के लिए नैतिकता और संस्कारो का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

 

12. कविता में सेवा का क्या महत्व है?

उत्तर: सेवा का महत्व इस तथ्य में है कि यह बिना स्वार्थ के दूसरो की मदद करने का प्रतीक है। जो समाज में एकता और सहयोग को बढ़ावा देता है।

 

13. कविता में कवि ने अपनी मातृभूमि के बारे में क्या कहा है?

उत्तर: कवि ने अपनी मातृभूमि को एक पवित्र, सर्वणी, गौरवमई और स्थान के रूप मे वर्णित जीवन, संस्कार और संस्कृति का प्रतीक माना है।


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