CLASS 6 : हिंदी : मातृभूमि
CLASS 6 : हिंदी मातृभूमि ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है , नीचे चरण तले झुक , नित सिंधु झूमता है। गंगा यमुन त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं , जगमग छटा निराली , पग-पग छहर रही हैं। वह पुण्य-भूमि मेरी , वह स्वर्ण-भूमि मेरी। वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी। झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में , चिड़ियाँ चहक रही हैं , हो मस्त झाड़ियों में। अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है , बहती मलय पवन है , तन-मन सँवारती है। वह धर्मभूमि मेरी , वह कर्मभूमि मेरी। वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी। जन्मे जहाँ थे रघुपति , जन्मी जहाँ थी सीता , श्रीकृष्ण ने सुनाई , वंशी पुनीत गीता। गौतम ने जन्म लेकर , जिसका सुयश बढ़ाया , जग को दया सिखाई , जग को दिया दिखाया। वह युद्ध-भूमि मेरी , वह बुद्ध-भूमि मेरी। वह मातृभूमि मेरी , वह जन्मभूमि मेरी। पुस्तक : मल्हार (पृष्ठ 1) रचनाकार : सोहनलाल द्विवेदी प्रकाशन : एनसीईआरटी